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कहानी बिजली की और बिजली कटौती की , सरकार बदली मगर बिजली कटौती नहीं बदली

जनवरी 31, 2020

बिजली कंपनी की दादागिरी और गुंडागर्दी जारी , रोजाना बिजली कटौती से मुरैना जिले में हड़कंप
बिना बिजली दिये ही दो साल से लगातार बिल दे और वसूल कर रही है बिजली कंपनी
मुरैना । 31 जनवरी , ग्वालियर टाइम्स ‌ । आज डिक्लेयर बिजली कटौती तो दस दिन अनडिक्लेयर बिजली कटौती , मुरैना मध्यप्रदेश के समूचे जिले का यही आलम है , दो साल से लगातार चल रही बिजली कंपनी के इस नाटक नौटंकी में बड़े बड़े शाही नवाब सरकार और बिजली चोर शामिल हैं जिनकी सीधी लिंक महप्रबंधक बिजली कंपनी मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और इसके उपमहाप्रबंधकों से लेकर लाइन मेनों से , मीटर रीडरों तक है ।
खुद बिजली कंपनी के अफसर और कर्मचारी करवाते हैं बिजली चोरी , ठेके पर महीना वसूला जाता है , कमीशन का खेल और ईमानदार उपभोक्ताओं को लाखों का चूना –
बीते समय में वर्ष सन 2010 से चलाई गई नये मीटर उपभोक्ताओं के यहां लगाने शुरू किए गये और शत प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां मीटर उनके घरों में और 5 सर्विस कनेक्शन मीटर इलेक्ट्रिक पोल पर शो और रिपोर्ट किये गये बिजली कंपनी द्वारा तथा ठेके पर फर्जी कंपनियों और फर्जी ठेकेदारों जो कि प्राक्सी लायसेंस पर दूसरों के काम करते थे , बिल्कुल ड्रग लायसेंस की तरह जो किराये पर उठा दिया जाता है और उसकी जगह मेडिकल स्टोर कोई और चलाता है , इसी तरह बिजली कंपनी में ठेकेदारी का लायसेंस किसी पर होता है और वह तमाम जिलों में तमाम जगह ठेके लेकर कमीशन के नाम से किराये पर लायसेंस उठा देता है और तमाम अयोग्य और अपात्र लोगों में ठेके बांट देता है , उसके बाद अमानक और गुणवत्ता विहीन , नियम व विधि विरूद्ध कार्य होने का कार्यक्रम शुरू होता है , जिसमें अधिकांश लायसेंस बिजली कंपनी के ही अधिकारीयों और कर्मचारियों के खुद के पास और उनके कुटुंब परिवार और नाते रिश्तेदारों के ही नाम से व उनके पास ही होते हैं , इसमें एक नियम का फायदा उठाया जाता है कि बिजली कंपनी से रिटायर हुये इंजीनियर को लायसेंस देने में प्राथमिकता दी जाएगी और इसी का फायदा उठाकर लायसेंस घर में ही बिजली कंपनी रखती है और मनमर्जी खुद ही खुद को ठेके के काम और ठेका राशि आवंटित करती है और उसके बाद मोटा कमीशन और किराया देने वाले टटपूंजिये अयोग्य और अपात्र गैर तकनीकी लोगों में ठेके बांट दिये जाते हैं , व फिर शुरू होता है लंबा गेम , भ्रष्टाचार और जनता के धन के गबन का , यह सिलसिला स्ट्रीट लाइट से लेकर ऐन किसानों के ट्रांसफार्मरों व उनके कुंओं के पंपों के कनेक्शन तक जाता है ।
इस लंबे भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने के तथा जनता के धन के गबन में महाप्रबंधक , जिला कलेक्टर और भोपाल में बैठे आला अफसर तक शामिल रहते हैं जिन पर कमीशन की मोटी रकम पहुंचती है और अंजाम यह कि ईमानदार उपभोक्ताओं की कहीं कोई सुनवाई और उनके आवेदनों पर कोई कार्यवाही नहीं होती , पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता को मूर्ख बनाने और आंखों में धूल झोंकने के लिये , पूर्व से मध्यप्रदेश में चल रही कंप्लेंट रिड्रेसल मैकेनिज्म जो कि बहुत विस्तृत चौकस और सटीक थी और जिस पर हुई शिकायत पर कार्यवाही गारंटेड और सुनिश्चित तौर पर मुकम्मल तय होती थी और वर्षों से चल रही इस व्यवस्था की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने की थी और यह सीधे मुख्यमंत्री द्वारा नियंत्रित होती थी तथा भाजपा के सन्निकट रहे तीन मुख्य मंत्रियों के कार्यकाल तक बदस्तूर जारी रही , उमा भारती, बाबू लाल गौर और खुद शिवराज सिंह चौहान के पहले कार्यकाल तक यह शानदार और जानदार कार्य प्रणाली एवं यह आनलाइन पोर्टल समाधान मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम से वेब एड्रेस  mpsamadhan.org पर सतत रूप से जारी रहा , जिस पर अधिकारी कर्मचारियों को लेवल में नहीं बांटा गया था और न शिकायत क्लोजिंग की कोई भी व्यवस्था थी , जिस पर एक बार हुई शिकायत भले ही कलेक्टर के खिलाफ हो , उचित स्तर पर मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं ही निर्धारित व आदेशित की जाती थी और जिसमें सिवाय कार्यवाही करने के अन्य कोई विकल्प किसी के पास नहीं होता था और न लेवल हुआ करते थे सीधे मंत्रालय से और बल्लभ भवन सचिवालय से कार्यवाही चलती थी और शिकायत निराकरण के बाद भी शिकायत कभी बंद नहीं की जाती थी , यह पोर्टल और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म , सूचना का अधिकार अधिनियम 2000 ( पूर्व में प्रचलित ) और नागरिक सिटीजन चार्ट के तहत काम करती थी और इसी के तहत ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रशासन में कसावट लाने के लिये टी एल यानि टाइम लिमिट अर्थात समयबद्ध व निर्धारित समय के भीतर काम करने की या किसी आवेदन को निपटाने की नीतिगत व्यवस्था आई, संयोग से इस प्रणाली को मुरैना के ही नेशनल नोबल यूथ अकादमी के नरेन्द्र सिंह तोमर ने तैयार किया और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को इसे अमल में लाने के लिए भेजा , जो कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बेहद पसंद आई और उन्होंने जन हित में इसे तत्काल लागू ही नहीं किया बल्कि बाकायदा सिटीजन चार्टर के नाम से पूरी एक प्रणाली और टी एल व्यवस्था अस्तित्व में आ गई, इस व्यवस्था के तहत जन समस्याये तुरंत व तत्काल हल होने लगीं, इससे पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने से शिकायतें या आवेदन महीनों और बरसों तक फाइलों में बंद लंबे पड़े रहते थे , कार्यवाही किस आवेदन पत्र पर , किस शिकायत पर करनी है या नहीं करनी है , वह तृतीय श्रेणी का बाबू मात्र या आफिस का चपरासी मात्र तय करता था , यदि रिश्र्वत और मनमाने धन का वजन फाइलों में और रिजर्व बैंक आफ इंडिया के के कितने कागज सर्टीफिकेट फाइलों में हैं , इस बात पर किसी भी आवेदन का मूवमेंट होता था या नहीं होता था , बहुत सारे ऐसे मामले होते थे जहां आवेदन देने वाला अपने आवेदन पर कार्यवाही के लिये दस बीस तीस पचास साल तक चक्कर काट काट कर दम तोड़ देता , फिर उसके उत्तराधिकारी आवेदन देते और यही सिलसिला चलता , मगर निराकरण नहीं होता  ।
आज जो जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र और भूमि भवन के नामांतरण आदि हजारों काम तय समय में या दिन में हो जाते हैं, यह पूरी प्रणाली और पूरे तौर तरीकों की खोज व ड्राफ्टिंग इसी मुरैना शहर में नरेन्द्र सिंह तोमर आनन्द ने की थी, उसी मुरैना शहर और जिले का असल आलम क्या है उसी पर यह विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत है –
शिवराज सिंह चौहान और उनकी अंधेर गर्दी और भ्रष्टाचार को और उनके वरदपरस्तों को पुरानी कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म कुछ दबाने छिपाने नहीं दे रही थी , जो कि अटल बिहारी वाजपेई को और उनकी सरकार को बेहद पसंद आई थी और पुरी भारत सरकार ने अपने हर विभाग और मंडल निगम तथा सरकार की नियंत्रित कंपनियों में भी सिटीजन चार्टर और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म लागू कर दी , इसके बाद सी बी आई में फाइट अगेन्स्ट करप्शन यानि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए न केवल सीबीआई को अलग से शक्ति दी बल्कि सी बी आई में पूरी एक अलग विंग बना कर उसे 24 घंटे भ्रष्टाचार और रिश्वत पकड़ने के लिये पावरफुल कर दिया ‌ ।
इन सबसे परेशान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने और उनके पालतू अफसरों ने एक नया तोड़ निकाला और आनन फानन में रातों-रात एक मोबाइल नंबर जारी किया गया और उसे सी एम हेल्प लाइन का नाम दिया गया , करीब 13-15 महीने बाद जब यह योजना कारगर नहीं लगी तो उसके लिये फिर से एक नई योजना बनाई गई और पुराने समाधान मुख्यमंत्री पोर्टल को पूरी तरह से बंद कर नया पोर्टल बनाने और चलाने का काम शुरू किया गया और जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक टोल फ्री नंबर 181 जारी किया गया और रातों-रात पुराने वेब पोर्टल को बंद कर दिया , जिससे उस पर दर्ज लाखों शिकायतें और उनका रिकार्ड खुद ब खुद गायब हो गया , इसके पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय के निजी सूत्रों ने की बार मुरैना के नरेन्द्र सिंह तोमर आनन्द से फेसबुक पर तथा अन्य जगह संपर्क किया गया मगर बात जमी नहीं  और अंततः सारा पोर्टल और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म चेंज कर दिया गया और वर्तमान व्यवस्था अस्तित्व में आई ।
लेवलवार इस व्यवस्था में भोपाल में अफसरों के कार्यवाही करने के अधिकार और प्रशासनिक कार्यवाही करने के कर्त्तव्य और दायित्व अधिकार सब पूरी तरह खत्म कर दिये और अफसरों, विशेषकर उच्च स्तरीय अफसरों का आम जनता से संपर्क पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और , हर आवेदन और शिकायत को उसी जिले में उन्हीं को अपने ही खिलाफ कार्यवाही के लिए सौंप दिया गया । परिणाम यह हुआ कि जनता जब तक समझ पाती तब तक गेम बहुत लंबा-चौड़ा हो चुका था , बात प्रसारित और प्रचारित होना बंद हो गई, ऊपर भोपाल तक पहुंचना बंद हो गई  लिहाजा जिलों के भ्रष्ट बेलगाम सांड हो गये , कार्यवाही खुद ही खुद के खिलाफ करनी थी, खुद के खिलाफ खुद ही शिकायत सुननी थी , इसलिये कार्यवाही का भी कोई भय नहीं रहा , एम पी आन लाइन से या जिला एन आई सी से संबंध या नाजायज संबंध बनाईये, रिश्वत दीजिए , पैसा फेंको तमाशा देखो , आवेदन और आवेदक जिंदगी भर लेवल 1-4 के बीच ही घूमता रहेगा , बार बार शिकायत करता रहेगा और शिकायतें अपने आप जिला एन आई सी क्लोज करती रहेगी , एक शिकायत बंद करने के लिये संबंधित अफसर से मुरैना एन आई सी द्वारा 500 रूपये मांगने और लेने तथा आवेदक (साले शब्द इस्तेमाल किया गया है) को लेवल 1 से चार तक घुमाते रहने की एक वीडियो रिकॉर्डिंग हमने खुद एन आई सी कक्ष में बैठकर रिकार्ड की है और हमारे पास सुरक्षित है , मजे की बात यह है की हम जिस शिकायत के सिलसिले में सी एस पी आफिस मुरैना में गये थे वह बिजली कंपनी के ही विरूद्ध हमारे द्वारा दी गई पुलिस एफआईआर के संबंध में पुलिस के तत्कालीन  टी आई के खिलाफ सी एम हेल्प लाइन में की गई शिकायत थी , हमने उस वक्त काफी समय अज्ञात अनपढ़ गंवार बन कर जिला एन आई सी के शिकायत कक्ष में गुजारा और रिकार्डिंग कर ली ‌ ‌।
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क्रमशः जारी अगले भाग में