मध्यप्रदेश के महाराष्ट्र रेल दुर्घटना में मारे गये 14 श्रमिकों‌ और घायलों पर रेल मंत्री पीयूष गोयल की नजर

मई 9, 2020

नांदेड़ मंडल के बदनपुर और करमाड स्टेशनों के बीच रेल पटरियों पर हुआ हादसा

8 मई, 2020 की सुबह 5.22 बजे हुए एक दुखद हादसे में मनमाड को जा रही एक मालगाड़ी ने रेलवे की पटरियों पर सो रहे लोगों के एक समूह को टक्कर मार दी। यह हादसा नांदेड़ मंडल के परभणी- मनमाड सेक्शन के बदनपुर और करमाड स्टेशनों के बीच हुआ।

19 लोगों के इस समूह में से 14 लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल 2 लोगों ने बाद में दम तोड़ दिया। मामूली घायल एक व्यक्ति का औरंगाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज हो रहा है।

माल गाड़ी के लोको पायलट ने रेल पटरियों पर लोगों के समूह को देखकर बार-बार हॉर्न बजाया। इसके  साथ ही उसने ट्रेन रोकने की हर संभव कोशिश, लेकिन इसके बावजूद हादसा हो गया।

सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), रेलवे की सुरक्षा इकाई के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल ही अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ घटना स्थल को रवाना हो गए।

नांदेड़ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री उपिंदर सिंह भी व्यक्तिगत रूप से राहत कार्यों की निगरानी के लिए घटना स्थल पर पहुंच गए। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से युक्त चिकित्सा राहत यान (एमआरवी) भी चिकित्सा सहायता के लिए चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को साथ लेकर घटना स्थल पर पहुंच गया। एससीआर के महाप्रबंधक श्री गजानन माल्या ने हादसे की सूचना मिलने के बाद तुरंत विभिन्न विभागों के प्रमुखों की बैठक बुलाई और तेजी से राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए।

रेलवे सुरक्षा आयुक्त (दक्षिण मध्य क्षेत्र) की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं और इस संबंध में उठाए जा रहे कदमों की उन्हें लगातार जानकारी दी जा रही है।

सांसद और केंद्रीय मंत्री लोकल होने के बावजूद , उदासीनता और जनकल्याण में रूचि होने से श्योपुर ग्वालियर ब्राडगेज परियोजना अधर में लटकी

फ़रवरी 2, 2020

कलेक्टर मुरैना द्वारा बार बार लिखा जा रहा पत्र और जानबूझ कर ग्वालियर श्योपुर रेल्वे लाइन को ब्राडगेज में बदलने हेतु भूमि अधिग्रहण नहीं कर रही रेल्वे और न मुआवजा दे रही है , भूमि मालिकों को, लिहाजा भूमि मालिक अधिगृहीत जमीन का न तो उपयोग कर सकते हैं और न मुआवजा ही और बदले की जमीन कहीं पा सकते हैं – नीचे कलेक्टर मुरैना द्वारा बार बार इस संबंध में लिखा जा रहे पत्र की मूल इबारत

ग्वालियर-श्योपुर रेल परियोजना हेतु भू-अर्जन की कार्यवाही के अन्तर्गत मुरैना जिले के अनुभाग सबलगढ़ में आपके प्रस्ताव अनुसार ग्राम मुकुन्दा, शेखपुर, डभेरा, पासौनकलां, पासौनखुर्द, गुदयामाफी, देवपुर माफी, तिन्दौली, पूछरी, काजौना, पावई, कीरतपुर, रामपहाड़ी, बाबड़ीपुरा, मानपुर, बौलाज एवं अनुभाग मुरैना के अतिरिक्त भूमि प्रस्ताव ग्राम जयपुर उर्फ नयागांव, बामौर के प्रस्तावों में भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-23 (अवार्ड) की समस्त औपचारिकतायें पूर्ण की जा चुकी है। किन्तु अर्जक निकाय रेल्वे से मांग अनुरूप मुआवजा राशि प्राप्त न होने से उक्त 18 ग्रामों के प्रकरण में अंतिम रूप से अवॉर्ड पारित नहीं किये जा सके है। परियोजनान्तर्गत भू-अधिग्रहण की कार्यवाही रेल्वे के प्रस्ताव अनुसार भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 40 (अर्जेन्सी क्लॉज) के अंतर्गत की जा रही है। अधिनियम में निहित प्रावधान अनुसार प्रतिकर की राशि अग्रिम रूप से जमा किया जाना प्रावधानित है। मांग की नई अनुमानित मुआवजा राशि 100.00 करोड़ की शीघ्र जमा करने की कार्यवाही की जावे, ताकि लंबित प्रकरणों में अवॉर्ड पारित करने की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जा सके।    
    परियोजना अन्तर्गत अधिगृहित भूमि के कब्जा प्राप्त करने हेतु बार-बार स्मरण उपरान्त भी आपके विभाग की ओर से कोई भी समक्ष अधिकारी कब्जा प्राप्त करने हेतु उपस्थित नहीं हो रहे है, और न ही संबंधित तहसीलदार से सम्पर्क किया जा रहा है। इस संबंध में शीघ्र किसी अधिकारी को अधिकृत कर कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किया जावे।
    भू-अर्जन के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण एवं उनके अधिग्रहण में आ रही कठिनाईयों के संबंध में आपके साथ 5 दिसम्बर 2019 को समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि आपसी समन्वय से प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जावे। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ़ एवं जौरा, मुरैना द्वारा मुझे अवगत कराया है कि आपके अधीनस्थ भू-अर्जन लाइजनिंग अधिकारी समय पर उपस्थित नहीं होते है, और न ही प्रकरणों के निराकरण के संबंध में सम्पर्क स्थापित किया जा रहा है, इससे ऐसा प्रतीत होता है कि उनके द्वारा भू अर्जन के प्रकरणों के शीघ्र निराकरण हेतु कोई रूचि नहीं ली जा रही है।

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, आपका जो भी है आपको मिलेगा – मुख्यमंत्री ने कहा

फ़रवरी 1, 2020
मुख्यमंत्री कमलनाथ श्रमजीवी पत्रकार संघ के पदाधिकारियों के साथ

जो आपका है वह आपको मिलेगा : कमलनाथ
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा 9 सूत्रीय ज्ञापन
अमरकंटक। मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने अमरकंटक प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ को 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर निराकरण की मांग की है। संघ के मुख्य कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अली के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकार भवन भोपाल के जमीन की लीज को मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के आधिपत्य में वापस दिए जाने, मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने तथा लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों से जुड़ी नीतिगत समस्याओं सहित 9 सूत्रीय मांगे शामिल है। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के मुख्य कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अली ने मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए बताया कि संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया की सरपरस्ती में वर्षों से प्रदेशभर के पत्रकार राजधानी में पत्रकार भवन पर एकत्रित होकर अपनी बातें रखते रहे हैं तथा पत्रकारों को वहां से अपनी समस्याओं का समाधान भी मिलता रहा है। लिहाजा पत्रकार भवन के भूमि की लीज बहाल करते हुए उसे पुनः मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ को सौंपा जाए। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आश्वस्त किया है कि जो आपका है वह आपको मिलेगा।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह शीघ्र ही ज्ञापन में शामिल बिंदुओं पर जनसंपर्क मंत्री से विचार विमर्श कर समाधान करेंगे। ज्ञापन सौंपते समय प्रदेश के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष मोहम्मद अली, अध्यक्ष मंडल के सचिव मनोज द्विवेदी, संभागीय अध्यक्ष अजीत मिश्रा, संभागीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा, जिला इकाई अनूपपुर के अध्यक्ष मुकेश मिश्रा, जिला इकाई शहडोल के अध्यक्ष राहुल सिंह राणा, आईटी सेल के संयोजक चंदन वर्मा सहित अन्य पत्रकार गण मौजूद रहे।

कहानी बिजली की और बिजली कटौती की , सरकार बदली मगर बिजली कटौती नहीं बदली

जनवरी 31, 2020

बिजली कंपनी की दादागिरी और गुंडागर्दी जारी , रोजाना बिजली कटौती से मुरैना जिले में हड़कंप
बिना बिजली दिये ही दो साल से लगातार बिल दे और वसूल कर रही है बिजली कंपनी
मुरैना । 31 जनवरी , ग्वालियर टाइम्स ‌ । आज डिक्लेयर बिजली कटौती तो दस दिन अनडिक्लेयर बिजली कटौती , मुरैना मध्यप्रदेश के समूचे जिले का यही आलम है , दो साल से लगातार चल रही बिजली कंपनी के इस नाटक नौटंकी में बड़े बड़े शाही नवाब सरकार और बिजली चोर शामिल हैं जिनकी सीधी लिंक महप्रबंधक बिजली कंपनी मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और इसके उपमहाप्रबंधकों से लेकर लाइन मेनों से , मीटर रीडरों तक है ।
खुद बिजली कंपनी के अफसर और कर्मचारी करवाते हैं बिजली चोरी , ठेके पर महीना वसूला जाता है , कमीशन का खेल और ईमानदार उपभोक्ताओं को लाखों का चूना –
बीते समय में वर्ष सन 2010 से चलाई गई नये मीटर उपभोक्ताओं के यहां लगाने शुरू किए गये और शत प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां मीटर उनके घरों में और 5 सर्विस कनेक्शन मीटर इलेक्ट्रिक पोल पर शो और रिपोर्ट किये गये बिजली कंपनी द्वारा तथा ठेके पर फर्जी कंपनियों और फर्जी ठेकेदारों जो कि प्राक्सी लायसेंस पर दूसरों के काम करते थे , बिल्कुल ड्रग लायसेंस की तरह जो किराये पर उठा दिया जाता है और उसकी जगह मेडिकल स्टोर कोई और चलाता है , इसी तरह बिजली कंपनी में ठेकेदारी का लायसेंस किसी पर होता है और वह तमाम जिलों में तमाम जगह ठेके लेकर कमीशन के नाम से किराये पर लायसेंस उठा देता है और तमाम अयोग्य और अपात्र लोगों में ठेके बांट देता है , उसके बाद अमानक और गुणवत्ता विहीन , नियम व विधि विरूद्ध कार्य होने का कार्यक्रम शुरू होता है , जिसमें अधिकांश लायसेंस बिजली कंपनी के ही अधिकारीयों और कर्मचारियों के खुद के पास और उनके कुटुंब परिवार और नाते रिश्तेदारों के ही नाम से व उनके पास ही होते हैं , इसमें एक नियम का फायदा उठाया जाता है कि बिजली कंपनी से रिटायर हुये इंजीनियर को लायसेंस देने में प्राथमिकता दी जाएगी और इसी का फायदा उठाकर लायसेंस घर में ही बिजली कंपनी रखती है और मनमर्जी खुद ही खुद को ठेके के काम और ठेका राशि आवंटित करती है और उसके बाद मोटा कमीशन और किराया देने वाले टटपूंजिये अयोग्य और अपात्र गैर तकनीकी लोगों में ठेके बांट दिये जाते हैं , व फिर शुरू होता है लंबा गेम , भ्रष्टाचार और जनता के धन के गबन का , यह सिलसिला स्ट्रीट लाइट से लेकर ऐन किसानों के ट्रांसफार्मरों व उनके कुंओं के पंपों के कनेक्शन तक जाता है ।
इस लंबे भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने के तथा जनता के धन के गबन में महाप्रबंधक , जिला कलेक्टर और भोपाल में बैठे आला अफसर तक शामिल रहते हैं जिन पर कमीशन की मोटी रकम पहुंचती है और अंजाम यह कि ईमानदार उपभोक्ताओं की कहीं कोई सुनवाई और उनके आवेदनों पर कोई कार्यवाही नहीं होती , पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता को मूर्ख बनाने और आंखों में धूल झोंकने के लिये , पूर्व से मध्यप्रदेश में चल रही कंप्लेंट रिड्रेसल मैकेनिज्म जो कि बहुत विस्तृत चौकस और सटीक थी और जिस पर हुई शिकायत पर कार्यवाही गारंटेड और सुनिश्चित तौर पर मुकम्मल तय होती थी और वर्षों से चल रही इस व्यवस्था की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने की थी और यह सीधे मुख्यमंत्री द्वारा नियंत्रित होती थी तथा भाजपा के सन्निकट रहे तीन मुख्य मंत्रियों के कार्यकाल तक बदस्तूर जारी रही , उमा भारती, बाबू लाल गौर और खुद शिवराज सिंह चौहान के पहले कार्यकाल तक यह शानदार और जानदार कार्य प्रणाली एवं यह आनलाइन पोर्टल समाधान मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम से वेब एड्रेस  mpsamadhan.org पर सतत रूप से जारी रहा , जिस पर अधिकारी कर्मचारियों को लेवल में नहीं बांटा गया था और न शिकायत क्लोजिंग की कोई भी व्यवस्था थी , जिस पर एक बार हुई शिकायत भले ही कलेक्टर के खिलाफ हो , उचित स्तर पर मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं ही निर्धारित व आदेशित की जाती थी और जिसमें सिवाय कार्यवाही करने के अन्य कोई विकल्प किसी के पास नहीं होता था और न लेवल हुआ करते थे सीधे मंत्रालय से और बल्लभ भवन सचिवालय से कार्यवाही चलती थी और शिकायत निराकरण के बाद भी शिकायत कभी बंद नहीं की जाती थी , यह पोर्टल और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म , सूचना का अधिकार अधिनियम 2000 ( पूर्व में प्रचलित ) और नागरिक सिटीजन चार्ट के तहत काम करती थी और इसी के तहत ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रशासन में कसावट लाने के लिये टी एल यानि टाइम लिमिट अर्थात समयबद्ध व निर्धारित समय के भीतर काम करने की या किसी आवेदन को निपटाने की नीतिगत व्यवस्था आई, संयोग से इस प्रणाली को मुरैना के ही नेशनल नोबल यूथ अकादमी के नरेन्द्र सिंह तोमर ने तैयार किया और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को इसे अमल में लाने के लिए भेजा , जो कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बेहद पसंद आई और उन्होंने जन हित में इसे तत्काल लागू ही नहीं किया बल्कि बाकायदा सिटीजन चार्टर के नाम से पूरी एक प्रणाली और टी एल व्यवस्था अस्तित्व में आ गई, इस व्यवस्था के तहत जन समस्याये तुरंत व तत्काल हल होने लगीं, इससे पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने से शिकायतें या आवेदन महीनों और बरसों तक फाइलों में बंद लंबे पड़े रहते थे , कार्यवाही किस आवेदन पत्र पर , किस शिकायत पर करनी है या नहीं करनी है , वह तृतीय श्रेणी का बाबू मात्र या आफिस का चपरासी मात्र तय करता था , यदि रिश्र्वत और मनमाने धन का वजन फाइलों में और रिजर्व बैंक आफ इंडिया के के कितने कागज सर्टीफिकेट फाइलों में हैं , इस बात पर किसी भी आवेदन का मूवमेंट होता था या नहीं होता था , बहुत सारे ऐसे मामले होते थे जहां आवेदन देने वाला अपने आवेदन पर कार्यवाही के लिये दस बीस तीस पचास साल तक चक्कर काट काट कर दम तोड़ देता , फिर उसके उत्तराधिकारी आवेदन देते और यही सिलसिला चलता , मगर निराकरण नहीं होता  ।
आज जो जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र और भूमि भवन के नामांतरण आदि हजारों काम तय समय में या दिन में हो जाते हैं, यह पूरी प्रणाली और पूरे तौर तरीकों की खोज व ड्राफ्टिंग इसी मुरैना शहर में नरेन्द्र सिंह तोमर आनन्द ने की थी, उसी मुरैना शहर और जिले का असल आलम क्या है उसी पर यह विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत है –
शिवराज सिंह चौहान और उनकी अंधेर गर्दी और भ्रष्टाचार को और उनके वरदपरस्तों को पुरानी कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म कुछ दबाने छिपाने नहीं दे रही थी , जो कि अटल बिहारी वाजपेई को और उनकी सरकार को बेहद पसंद आई थी और पुरी भारत सरकार ने अपने हर विभाग और मंडल निगम तथा सरकार की नियंत्रित कंपनियों में भी सिटीजन चार्टर और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म लागू कर दी , इसके बाद सी बी आई में फाइट अगेन्स्ट करप्शन यानि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए न केवल सीबीआई को अलग से शक्ति दी बल्कि सी बी आई में पूरी एक अलग विंग बना कर उसे 24 घंटे भ्रष्टाचार और रिश्वत पकड़ने के लिये पावरफुल कर दिया ‌ ।
इन सबसे परेशान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने और उनके पालतू अफसरों ने एक नया तोड़ निकाला और आनन फानन में रातों-रात एक मोबाइल नंबर जारी किया गया और उसे सी एम हेल्प लाइन का नाम दिया गया , करीब 13-15 महीने बाद जब यह योजना कारगर नहीं लगी तो उसके लिये फिर से एक नई योजना बनाई गई और पुराने समाधान मुख्यमंत्री पोर्टल को पूरी तरह से बंद कर नया पोर्टल बनाने और चलाने का काम शुरू किया गया और जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक टोल फ्री नंबर 181 जारी किया गया और रातों-रात पुराने वेब पोर्टल को बंद कर दिया , जिससे उस पर दर्ज लाखों शिकायतें और उनका रिकार्ड खुद ब खुद गायब हो गया , इसके पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय के निजी सूत्रों ने की बार मुरैना के नरेन्द्र सिंह तोमर आनन्द से फेसबुक पर तथा अन्य जगह संपर्क किया गया मगर बात जमी नहीं  और अंततः सारा पोर्टल और कंप्लैंट रिड्रेसल मैकेनिज्म चेंज कर दिया गया और वर्तमान व्यवस्था अस्तित्व में आई ।
लेवलवार इस व्यवस्था में भोपाल में अफसरों के कार्यवाही करने के अधिकार और प्रशासनिक कार्यवाही करने के कर्त्तव्य और दायित्व अधिकार सब पूरी तरह खत्म कर दिये और अफसरों, विशेषकर उच्च स्तरीय अफसरों का आम जनता से संपर्क पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और , हर आवेदन और शिकायत को उसी जिले में उन्हीं को अपने ही खिलाफ कार्यवाही के लिए सौंप दिया गया । परिणाम यह हुआ कि जनता जब तक समझ पाती तब तक गेम बहुत लंबा-चौड़ा हो चुका था , बात प्रसारित और प्रचारित होना बंद हो गई, ऊपर भोपाल तक पहुंचना बंद हो गई  लिहाजा जिलों के भ्रष्ट बेलगाम सांड हो गये , कार्यवाही खुद ही खुद के खिलाफ करनी थी, खुद के खिलाफ खुद ही शिकायत सुननी थी , इसलिये कार्यवाही का भी कोई भय नहीं रहा , एम पी आन लाइन से या जिला एन आई सी से संबंध या नाजायज संबंध बनाईये, रिश्वत दीजिए , पैसा फेंको तमाशा देखो , आवेदन और आवेदक जिंदगी भर लेवल 1-4 के बीच ही घूमता रहेगा , बार बार शिकायत करता रहेगा और शिकायतें अपने आप जिला एन आई सी क्लोज करती रहेगी , एक शिकायत बंद करने के लिये संबंधित अफसर से मुरैना एन आई सी द्वारा 500 रूपये मांगने और लेने तथा आवेदक (साले शब्द इस्तेमाल किया गया है) को लेवल 1 से चार तक घुमाते रहने की एक वीडियो रिकॉर्डिंग हमने खुद एन आई सी कक्ष में बैठकर रिकार्ड की है और हमारे पास सुरक्षित है , मजे की बात यह है की हम जिस शिकायत के सिलसिले में सी एस पी आफिस मुरैना में गये थे वह बिजली कंपनी के ही विरूद्ध हमारे द्वारा दी गई पुलिस एफआईआर के संबंध में पुलिस के तत्कालीन  टी आई के खिलाफ सी एम हेल्प लाइन में की गई शिकायत थी , हमने उस वक्त काफी समय अज्ञात अनपढ़ गंवार बन कर जिला एन आई सी के शिकायत कक्ष में गुजारा और रिकार्डिंग कर ली ‌ ‌।
……..
क्रमशः जारी अगले भाग में

YouTube पर “MOhini Stotra मोहिनी स्तोत्र ( वशीकरण विद्या ) – 1” देखें

फ़रवरी 19, 2017

YouTube पर “Hai Preet Jahan Ki Reet” देखें

फ़रवरी 1, 2017

हमें ट्विटर पर भी मिलें

जनवरी 29, 2017

GWALIOR TIMES (@gwaliortimes) पर नजर डालें: https://twitter.com/gwaliortimes?s=09 

बार काउंसिल के विवादित नियमों व फैसलों पर हाई कोर्ट का स्टे , हाईकोर्ट ने कहा नॉन प्रेक्ट‍िशनर्स एडवोकेटस भी बार के चुनावों में मतदाता हैं

अक्टूबर 25, 2016

बार काउंसिल के विवादित नियमों व फैसलों पर हाई कोर्ट का स्टे , हाईकोर्ट ने कहा नॉन प्रेक्ट‍िशनर्स एडवोकेटस भी बार के चुनावों में मतदाता हैं

GWALIOR TIMES ग्‍वालियर टाइम्‍स

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सबई भूमि गोपाल जी की, भारत पाकिस्तान का बंटवारा अवैध व फर्जी , स्वामित्वहीन सरकार

सितम्बर 18, 2016

GWALIOR TIMES ग्‍वालियर टाइम्‍स

भारत पाकिस्तान का बंटवारी फर्जी और अवैध , किसी भी सरकार के पास आज तक नहीं है भारत का या अन्य किसी देश का स्वामित्व
केवल कब्जा ही कब्जा है , इन मिसाइलों में केवल धुंआ ही धुंआ बचा है , फयूज कण्डक्टर तो आज तक किसी और के पास हैं
नरेन्द्र सिंह तोमर ”आनन्द” , एडवोकेट , मुरैना , म.प्र.
एक शानदार जानदार व रोचक जानकारी – भारत के आज के संविधान और आज प्रचलित कानून के मुताबिक भी , भारत सरकार और पाकिस्तान , बर्मा, बंगलादेश सहित तमाम देशों सरकारों के पास इन देशों की किसी भी सम्पत्ति‍ , भूमि या अन्य किसी भी भौतिक वस्तु व मानव मात्र पर स्वामित्व नहीं है , महज मात्र एक कब्जाधारी के रूप में अतिक्रामक व केवल कब्जाधारी सरकारें हैं , इनमें से स्वामित्व किसी के पास भी नहीं हैं ।
इसे कुछ यूं समझें , कानून में ( अंग्रेजों का…

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फिल्म – भारत ( भाग -2 ) महाभारत की कुन्ती का कुन्तल पुर , हल्दीघाटी युद्ध

जुलाई 16, 2016
भारत फिल्म ( भाग - 2)